Monday, September 1, 2014

(( आज के बड़े अखबार जगत का आतंरिक सच ))




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अखबार  और  अख़बार  मालिको  के  खिलाफ  पूर्व के  पत्रकारों   मे  जो  गुस्सा  और  आक्रोश  है क्या  उनसब  लोगो  को एक साथ मिलाकर आज एक अच्छा  अख़बार  निकाला जा  सकता है.....? अगर हाँ तो उनका अखबार मार्केट में आएगा कैसे ....? पाठको तक पहुंचेगा कैसे....?  क्यों कि आज का मार्केट तो बिकाऊ मीडिया, बिकाऊ अखबार से अटा पड़ा है, भरा पड़ा है, और बिकाऊ मीडिया किसे कहते है बिकाऊ अखबार किसे कहते है आज के टाइम में वह भी किसी से छुपा नहीं है ! आज सबसे बड़ा संकट अच्छे अखबार का पाठको तक पहुचना है क्यों कि मार्केट बाज़ारवाद कि राह पर चल पड़ा है सिर्फ मुनाफा सिर्फ मुनाफा दिखाई दे रहा है लोगो को ! अच्छे पत्रकार तब भी संकट में थे जब उनके साथ भेद भाव हुआ आज भी संकट में है जब उन्होंने खुद को अखबार कि राजनीति से दूर कर लिया है और अपने पत्रकार धर्म को निभाने के लिए उनके पास विकल्प नहीं है ! तो क्या सिर्फ बिकाऊ अखबार और बिकाऊ पत्रकार के डैम पर ही चलेगा अब अखबार जगत क्या सच कि आवाज़ को मार्केट के अखबार के घाटे मुनाफे से आँका जाएगा और अनदेखा किया जाएगा ! क्या सर्कुलेसन बढ़ाना , मार्केट में जमे रहने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाना ही मकसद रह गया है अब अखबार जगत का .....? यह  थोड़ा  बड़ा  सवाल है और लिक से हटकर भी है, पचाना कठिन होगा आज के अखबार प्रणाली में काम करने वालो के लिए ....किन्तु सवाल है गंभीर और समयोचित भी !  क्यों कि  जो  गन्दगी गंदे  लोग  कर  सकते  है  वो  सबके बस की  बात नहीं   पूर्व में  जिन   पत्रकारों ने पत्रकारिता के मूल्यों वसूलों के चलते    अख़बार  को  अपनी  इच्छा  और से  छोड़ा वो  गन्दगी कर नहीं पाये समझौता कर नहीं पाये अपने सच्चे पत्रकार धर्म से ! सायद कर पाते तो आज के अखबार प्रणाली के वो भी हिस्सा होते ...........?
सवाल यह भी है की जो पत्रकार आज के अखबार प्रणाली में काम कर रहा है क्या वह सच्चा पत्रकार है .................?.
क्यों की आज की अखबार प्रणाली ही सवाल है उन पत्रकारों के पत्रकार होने पर जो आज के अखबार प्रणाली में काम कर रहे है और अपने सच्चे पत्रकार धर्म से समझौता भी ......................???
जय हिन्द .... !!

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