Monday, September 1, 2014

2 पैग - 2 बूंद






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सभी  2 पैग  वाले  ध्यान  दें  -
3 जुलाई  को बिलकुल  निःशुल्क 2  बूंद  ज़िन्दगी की  पोलियो  ड्रॉप  पी  कर  अपनी लड़खड़ाती  हुई  ज़िन्दगी  को  सवारे .......!!

अगर समय से नशा उत्तर जाए तो आग्रह है अपने 5 साल तक  के बच्चो को पोलियो बूथ जरूर ले जाएं ...............!!
सादर
प्रदीप दुबे

डॉक्टर कुरैशी साहब से एक सवाल




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डॉक्टर कुरैशी साहब से एक सवाल है मेरा-  कुरैशी  साहब कृपया बताये क्या आज जो उत्तर प्रदेश की हालत है , जो अराजकता फैली है आज उत्तर प्रदेश में इसे रोकने अल्लाह या भगवान या जीसस आएंगे या क़ानून बेवस्था सुदृढ़ करने से रुकेगा यह सब कुछ !
दूसरे के मत्थे मढ़ देने से आप की ज़िम्मेदारी कम नहीं हो जाती, ना ही आपकी उदासीनता छुप सकती है जनता की नज़र से क्यों की आज जनता परदे के पीछे का भी सच जान चुकी है वह मुखर होना भी चाहती है किन्तु किसके दम पर मुखर हो क्यों की उत्तर प्रदेश में जो जंगल राज कायम हुआ है इस जंगल राज में हर तंत्र भ्रस्ट हो चुका है ! घर के बाहर कदम रखने के बाद ये नहीं समझ आता परेसानी के टाइम किससे सहायता मांगी जाए किसपर विश्वाश किया जाए जबकि हर १०० कदम पर एक पुलिस चौकी नज़र आती है और उस चौकी में बैठे भूरी वर्दी में कुछ दबंक भी ऐसे बहरे दबंग जिनके कान को सिर्फ पैसे की खनक सुनाई देती है ऐसे आँख के अंधे जिनकी आँख को सिर्फ लाल हरी नोट के पत्ते दिखाई देते है , जिनकी भूरि वर्दी में जाने कितने गुनाह की फाइल दफ़न हो जाती है और कितने गुनहगार अपने गुनाह की कालिख पोछ कर वाइज्ज़त बरी हो जाते है !
कुरैशी साहब जो आपके हाथ में है उसपर पहले अमल करिये , त्वरित अमल करिये और उत्तर प्रदेश में अराजकता का माहौल ख़त्म हो इसके लिए क़ानून ब्यवस्था को खंघालिये, ज़माने से गुनाह और गुनहगार की काली करतूतो को छुपाते छुपाते जो भूरी वर्दी मैली हो चुकी है उसकी धुलाई करवाने की ज़रूरत है अब ! क़ानून ब्यवस्था में कहा क्या कमी है जिससे निकम्मी साबित हो रही है उत्तर प्रदेश पुलिस इसपर गहन चिंतन करिये, मनन करिये और सवस्थ परिणाम निकालिये वार्ना आड़ रखिये ये लोकतंत्र है यहाँ सिर्फ किसी मज़बूर की किसी असहाय की बेटी बहन ही नहीं घटना की शिकार हो सकती है वी० वी० आई० पी० लोगो की बहु , बहन , बेटी भी इस घटना की शिकार हो सकती है ! एक प्रायमरी स्कूल की टीचर , एक मेडिकल की स्टूडेंट एक गाँव की सीधी साधी लड़की एक कॉलेज गोइंग लड़की एक ऑटो में सवार आम लड़की , एक सब्जी खरीदती हुई लड़की ही नहीं निर्भया की श्रेणी में खड़ी होंगी बल्कि मर्सिडीज में चलने वाली  वी० वी० आई० पी० घर की   वी० वी० आई० पी० लड़की अपने ड्राइवर के हाथो नहीं सुरक्षित होगी , गनर लेकर चलने वाली  वी० वी० आई० पी० घर की  वी० वी० आई० पी० लड़की अपने गनर के हाथो नहीं सुरक्षित होगी ! तमाम नौकर चाकर की सेवा लेने वाली  वी० वी० आई० पी० घर की लड़की आलीसान बंगलों में रहने वाली  वी० वी० आई० पी० भी अपने नौकर चाकर के हाथो ही सुरक्षित नहीं होगी ! क्यों की उतार प्रदेश की क़ानून ब्यवस्था का कोई खोज खबर लेने वाला नहीं इस क़ानून ब्यवस्था के माई - बाप बहुत दबंग है जिनकी दबंगई के चलते एक कुरैशी साहब आम लड़की पर ही खतरा नहीं मंडरा रहा है उत्तर प्रदेश में ख़ास लड़की भी अब इसका शिकार हो सकती है क्यों की डेमोक्रेसी ( लोकतंत्र ) में एक तरह का डंडा सबके लिए चलने की बात कही गई है तो फिर डंडा चाहे जिसका हो जो डंडा मजबूत होगा वह सबपर चलेगा ! इत्तेफ़ाकन आज उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और दुष्कर्म का डंडा बहुत मजबूत हो चूका है अब इस डंडे से सिर्फ आम घर की आम महिलाये या लडकिया ही नहीं बल्कि खास घर की खास महिलाये और लडकिया भी आहात होंगी और निश्चित रूप से तभी आम का दर्द खास की समझ में भी आएगा ! कुरैशी साहब एक आम नागरिक का आप से अनुरोध है अप्राद और दुष्कर्म के डंडे को तोड़ने के लिए नए सिरे से क़ानून के डंडे को मजबूत कवाइये ,उत्तर प्रदेश की क़ानून ब्यवस्था में पारदर्शिता लाइए !
खुदा -खुदा, भगवान भगवान , यह जुमला वोट बैंक की राजनीत तक ही रखिये ! इसे स्त्री सुरक्षा और स्त्री अस्मिता के साथ मत जोड़िये वार्ना आम के साथ ख़ास घर की खास स्त्रियों लड़कियों की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी क्यों की बौने कानून ब्यवस्था को कोई भी मूह चिढ़ा कर जा सकता है एक खास घर की लड़की का आम ड्राइवर भी ! अतः जब बात प्रदेश की  सुरक्षा से जुडी हो तो कानून को खंगालने की ज़रूरत सबसे पहली ज़रूरत होनी चाहिए क़ानून में पारदर्शिता सबसे पहली ज़रूरत होनी चाहिए कुरैशी साहब  !

द्वारा -
प्रदीप दुबे

अटेन्सन



अटेन्सन - अटेन्सन प्लीज अटेन्सन  
मथुरा वाया वरसाने होते हुए आज सांय 4 बजे एक ट्रेन स्वर्ग लोग को जाने वाली है ! उन सभी कृष्ण भग्तो से सादर अनुरोध है जिनहोने  कल सुबह से भूखे - प्यासे रह कर हज़ारो हज़ार टन दूध,घी,सहद,मक्खन -मिश्री, फल, मावा,कृष्ण की मूर्ति पर अर्पण कर भगवन कृष्ण के प्रति अपनी अंधभक्ति दिखाया, कृपया आज समय से रेलवे स्टेशन पर उपस्थित होकर स्वर्ग जाने वाली इस ट्रेन का लाभ उठाये मूर्ति के बजाये साक्क्षात भगवन कृष्ण के साथ जन्माष्टमी का आनंद उठाये साथ ही  भगवान कृष्ण के हाथो अपनी अंध भक्ति का सर्टिफिकेट प्राप्त करे भी प्राप्त करे ! सीटें सिमित केवल वी०वी०आई० पी० कोटे को वरीयता, ट्रेन के स्वर्ग पहुचने का टाईम रात्रि 12  बजे !
धरती से केवल ब्लैक मनी एवं सोना-चांदी ले जाने की ही छूट !
अधिक जानकारी के लिए भगवान श्रीकृष्ण के जन्म स्थान के पी० एन०टी० नंबर यानी 100 नंबर पर ट्राई करे यकीन माने कभी नहीं लगेगा !
सादर -
प्रदीप दुबे

(( आज के बड़े अखबार जगत का आतंरिक सच ))




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अखबार  और  अख़बार  मालिको  के  खिलाफ  पूर्व के  पत्रकारों   मे  जो  गुस्सा  और  आक्रोश  है क्या  उनसब  लोगो  को एक साथ मिलाकर आज एक अच्छा  अख़बार  निकाला जा  सकता है.....? अगर हाँ तो उनका अखबार मार्केट में आएगा कैसे ....? पाठको तक पहुंचेगा कैसे....?  क्यों कि आज का मार्केट तो बिकाऊ मीडिया, बिकाऊ अखबार से अटा पड़ा है, भरा पड़ा है, और बिकाऊ मीडिया किसे कहते है बिकाऊ अखबार किसे कहते है आज के टाइम में वह भी किसी से छुपा नहीं है ! आज सबसे बड़ा संकट अच्छे अखबार का पाठको तक पहुचना है क्यों कि मार्केट बाज़ारवाद कि राह पर चल पड़ा है सिर्फ मुनाफा सिर्फ मुनाफा दिखाई दे रहा है लोगो को ! अच्छे पत्रकार तब भी संकट में थे जब उनके साथ भेद भाव हुआ आज भी संकट में है जब उन्होंने खुद को अखबार कि राजनीति से दूर कर लिया है और अपने पत्रकार धर्म को निभाने के लिए उनके पास विकल्प नहीं है ! तो क्या सिर्फ बिकाऊ अखबार और बिकाऊ पत्रकार के डैम पर ही चलेगा अब अखबार जगत क्या सच कि आवाज़ को मार्केट के अखबार के घाटे मुनाफे से आँका जाएगा और अनदेखा किया जाएगा ! क्या सर्कुलेसन बढ़ाना , मार्केट में जमे रहने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाना ही मकसद रह गया है अब अखबार जगत का .....? यह  थोड़ा  बड़ा  सवाल है और लिक से हटकर भी है, पचाना कठिन होगा आज के अखबार प्रणाली में काम करने वालो के लिए ....किन्तु सवाल है गंभीर और समयोचित भी !  क्यों कि  जो  गन्दगी गंदे  लोग  कर  सकते  है  वो  सबके बस की  बात नहीं   पूर्व में  जिन   पत्रकारों ने पत्रकारिता के मूल्यों वसूलों के चलते    अख़बार  को  अपनी  इच्छा  और से  छोड़ा वो  गन्दगी कर नहीं पाये समझौता कर नहीं पाये अपने सच्चे पत्रकार धर्म से ! सायद कर पाते तो आज के अखबार प्रणाली के वो भी हिस्सा होते ...........?
सवाल यह भी है की जो पत्रकार आज के अखबार प्रणाली में काम कर रहा है क्या वह सच्चा पत्रकार है .................?.
क्यों की आज की अखबार प्रणाली ही सवाल है उन पत्रकारों के पत्रकार होने पर जो आज के अखबार प्रणाली में काम कर रहे है और अपने सच्चे पत्रकार धर्म से समझौता भी ......................???
जय हिन्द .... !!